BRICS देशों का गोल्ड पर कब्ज़ा: क्या डॉलर के बुरे दिन आने वाले हैं?

दुनिया की वैश्विक आर्थिक व्यवस्था इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। दशकों से अमेरिकी डॉलर (US Dollar) जिस तरह से पूरी विश्व अर्थव्यवस्था पर हावी रहा है, अब उस वर्चस्व को BRICS देशों की संयुक्त रणनीति से गंभीर चुनौती मिलती दिख रही है। खास बात यह है कि BRICS देश आज दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत सोने के उत्पादन पर नियंत्रण रखते हैं। ऐसे में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में डॉलर की ताकत कमजोर हो सकती है?

BRICS देशों के नेता और सोने के भंडार, वैश्विक गोल्ड उत्पादन पर BRICS का नियंत्रण और डॉलर पर असर
BRICS देश दुनिया के लगभग 50% सोने के उत्पादन को नियंत्रित करते हुए वैश्विक आर्थिक संतुलन को बदल रहे हैं

BRICS क्या है? (What is BRICS)

BRICS पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें शामिल हैं:

  • ब्राज़ील (Brazil)
  • रूस (Russia)
  • भारत (India)
  • चीन (China)
  • दक्षिण अफ्रीका (South Africa)

हाल के वर्षों में BRICS का विस्तार हुआ है और इसमें सऊदी अरब, ईरान, UAE, मिस्र जैसे देशों को भी जोड़ा गया है। यह समूह दुनिया की लगभग 40% आबादी और 30% से अधिक वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है।

सोना क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

सोना सदियों से सबसे भरोसेमंद संपत्ति (Safe Haven Asset) माना जाता रहा है। जब भी दुनिया में युद्ध, आर्थिक संकट या मुद्रास्फीति बढ़ती है, तब देश और निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं।

सोने की प्रमुख विशेषताएं

  • यह किसी एक देश की मुद्रा पर निर्भर नहीं करता
  • महंगाई से सुरक्षा प्रदान करता है
  • राजनीतिक प्रतिबंधों से मुक्त रहता है
  • दीर्घकालीन मूल्य सुरक्षित रखता है

BRICS देशों का वैश्विक सोने पर नियंत्रण

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार BRICS देश और उनके सहयोगी देश दुनिया के लगभग 50% सोने का उत्पादन करते हैं। इसमें चीन और रूस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

देश वार्षिक गोल्ड उत्पादन (टन)
चीन 380+
रूस 340+
भारत 35+
दक्षिण अफ्रीका 100+

BRICS देशों का गोल्ड रिज़र्व

सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि BRICS देशों के सेंट्रल बैंकों ने भी बीते वर्षों में भारी मात्रा में सोना खरीदा है।

  • रूस – 2300+ टन
  • चीन – 2200+ टन
  • भारत – 880+ टन
  • ब्राज़ील – 140+ टन

डॉलर पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?

अमेरिकी डॉलर आज भी दुनिया की सबसे बड़ी रिज़र्व मुद्रा है, लेकिन इसके वर्चस्व को कई कारणों से चुनौती मिल रही है।

1. De-Dollarisation की प्रक्रिया

BRICS देश धीरे-धीरे डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार कर रहे हैं। भारत और रूस के बीच तेल व्यापार रुपये में इसका बड़ा उदाहरण है।

2. अमेरिकी प्रतिबंधों से डर

रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने कई देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि डॉलर आधारित रिज़र्व राजनीतिक हथियार बन सकता है।

3. गोल्ड आधारित वैकल्पिक व्यवस्था

BRICS देश भविष्य में गोल्ड बैक्ड करेंसी या वैकल्पिक भुगतान प्रणाली पर काम कर रहे हैं, जिससे डॉलर की आवश्यकता कम हो सकती है।

क्या डॉलर खत्म हो जाएगा?

विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका वर्चस्व जरूर कमजोर हो सकता है। डॉलर का प्रभुत्व दशकों में बना है और उसका पतन भी धीरे-धीरे होगा।

भारत की भूमिका

भारत इस पूरे समीकरण में एक संतुलित नीति अपना रहा है। भारत ने:

  • अपने गोल्ड रिज़र्व को बढ़ाया
  • स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा दिया
  • BRICS मंच पर सक्रिय भूमिका निभाई

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है और घरेलू निवेश में सोने का बड़ा योगदान है।

भविष्य की तस्वीर

आने वाले समय में दुनिया एक बहु-मुद्रा प्रणाली की ओर बढ़ सकती है, जहां डॉलर के साथ-साथ सोना, युआन, यूरो और अन्य मुद्राओं का भी महत्व बढ़ेगा।

संभावित बदलाव

  • डॉलर की हिस्सेदारी में गिरावट
  • सोने की कीमतों में तेजी
  • BRICS देशों की आर्थिक शक्ति में वृद्धि

निष्कर्ष

BRICS देशों द्वारा वैश्विक सोने के लगभग 50% उत्पादन पर नियंत्रण एक ऐतिहासिक आर्थिक बदलाव का संकेत है। यह सीधे तौर पर डॉलर को खत्म नहीं करेगा, लेकिन उसकी एकछत्र सत्ता को चुनौती जरूर देगा। आने वाले वर्षों में दुनिया की आर्थिक व्यवस्था अधिक संतुलित, विविध और सुरक्षित बन सकती है।

Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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