भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जो कभी देश की राजनीति की सबसे मजबूत और प्रभावशाली पार्टी मानी जाती थी, आज गंभीर संगठनात्मक संकट से गुजर रही है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा हाल ही में दिया गया बयान इसी संकट की ओर इशारा करता है।
उनकी चेतावनी केवल एक बयान नहीं बल्कि पार्टी के भविष्य को लेकर एक गंभीर संदेश है।

दिग्विजय सिंह का बयान: क्या है पूरा मामला?
दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की कार्यसमिति बैठक और सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी को उजागर किया।
उन्होंने यह स्वीकार किया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संगठनात्मक ढांचा कांग्रेस की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और अनुशासित है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह RSS की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन संगठन की मजबूती से सीख लेने की बात कही।
यह बयान ऐसे समय आया जब कांग्रेस लगातार चुनावी हार का सामना कर रही है और पार्टी के भीतर नेतृत्व, रणनीति और संगठन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस संगठन की मौजूदा स्थिति
कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी समस्या उसका कमजोर जमीनी संगठन है।
कई राज्यों में न तो समय पर प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हुआ और न ही जिला व ब्लॉक स्तर पर संगठन मजबूत हो पाया।
इसका सीधा असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा है।
उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक कमजोरी
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस लंबे समय से हाशिये पर है।
पार्टी यहां मजबूत संगठन खड़ा करने में असफल रही।
कार्यकर्ताओं में निराशा है और नेतृत्व की स्पष्ट दिशा का अभाव दिखाई देता है।
बिहार और अन्य राज्यों की स्थिति
बिहार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी कांग्रेस संगठन आंतरिक कलह और ढीली संरचना से जूझता रहा है।
कई बार चुनाव के ठीक पहले संगठन खड़ा करने की कोशिश की जाती है, जो कभी भी प्रभावी साबित नहीं होती।
संगठन कमजोर होने के मुख्य कारण
- जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा
- समय पर संगठनात्मक नियुक्तियों का न होना
- केंद्रीय नेतृत्व पर अत्यधिक निर्भरता
- स्पष्ट राजनीतिक रणनीति का अभाव
- डिजिटल और डेटा आधारित राजनीति में पिछड़ापन
BJP और RSS से तुलना क्यों हुई?
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद सबसे बड़ा विवाद RSS और BJP की तुलना को लेकर हुआ।
वास्तविकता यह है कि BJP का संगठन बूथ स्तर तक मजबूत है।
RSS के स्वयंसेवक लगातार प्रशिक्षण, अनुशासन और विचारधारा के साथ काम करते हैं।
इसके विपरीत कांग्रेस का संगठन चुनावी मौसम में ही सक्रिय होता नजर आता है।
यही कारण है कि BJP लगातार चुनावी बढ़त बनाए हुए है।
पार्टी के भीतर विरोध और समर्थन
समर्थन में आए नेता
कुछ कांग्रेस नेताओं ने दिग्विजय सिंह के बयान को आत्ममंथन का अवसर बताया।
उनका मानना है कि कांग्रेस को संगठन पर नए सिरे से काम करने की जरूरत है।
विरोध करने वाले नेता
वहीं कई नेताओं ने RSS की तारीफ को गलत ठहराया।
उनका कहना है कि कांग्रेस की विचारधारा RSS से पूरी तरह अलग है और तुलना करना ही गलत है।
संगठनात्मक कमजोरी का चुनावी असर
कमजोर संगठन का सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ता है।
जब पार्टी के पास प्रशिक्षित कार्यकर्ता नहीं होते, तो जनता तक मुद्दे सही तरीके से नहीं पहुंच पाते।
इसका फायदा विपक्ष उठाता है।
कांग्रेस की लगातार हार का एक बड़ा कारण यही संगठनात्मक कमजोरी मानी जा रही है।
कांग्रेस के सामने आने वाली चुनौतियाँ
- कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरना
- युवा नेताओं का पार्टी छोड़ना
- क्षेत्रीय दलों पर बढ़ती निर्भरता
- राष्ट्रीय राजनीति में कमजोर उपस्थिति
आगे का रास्ता: कांग्रेस क्या कर सकती है?
अगर कांग्रेस को फिर से मजबूत बनना है तो उसे संगठन पर गंभीरता से काम करना होगा।
सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा।
संभावित समाधान
- हर राज्य में मजबूत और स्थायी संगठन का निर्माण
- युवा और जमीनी नेताओं को आगे लाना
- डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीति को मजबूत करना
- कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना
दिग्विजय सिंह की चेतावनी का महत्व
दिग्विजय सिंह का बयान दरअसल कांग्रेस के लिए एक चेतावनी है।
यह आत्मचिंतन का समय है।
अगर पार्टी ने समय रहते संगठनात्मक सुधार नहीं किए, तो आने वाले चुनावों में स्थिति और खराब हो सकती है।
निष्कर्ष
कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब यह खुलकर सामने आ चुकी है।
दिग्विजय सिंह का बयान एक कड़वा सच है।
अगर कांग्रेस को भारतीय राजनीति में फिर से मजबूत भूमिका निभानी है, तो उसे अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करना होगा।
यह लेख कांग्रेस पार्टी की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की दिशा को समझने का एक प्रयास है।
आने वाला समय तय करेगा कि कांग्रेस इस चेतावनी को गंभीरता से लेती है या नहीं।
