आपातकाल में कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र का दमन – 10 चौंकाने वाले तथ्य

आपातकाल (Emergency 1975)

कांग्रेस ने लोकतंत्र को कैसे कुचला – आपातकाल 1975 की सच्चाई

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 की रात को “काली रात” कहा जाता है। उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल (Emergency) की घोषणा कर दी।

आधिकारिक कारण था – “देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा”, लेकिन वास्तविकता यह थी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद, जिसमें इंदिरा गांधी को चुनावी भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया गया था, सत्ता बचाने के लिए यह कदम उठाया गया। यही वह क्षण था जब आपातकाल में कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र का दमन शुरू हुआ। आने वाले 21 महीनों तक पूरे देश ने देखा कि किस तरह आपातकाल में कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र का दमन कर विपक्ष, प्रेस, कलाकारों और आम नागरिकों की आवाज़ को कुचल दिया गया।

आपातकाल के दौरान उठाए गए कदम:

  • अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल घोषित।
  • विपक्षी नेताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी (जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी आदि)।
  • प्रेस सेंसरशिप – अखबारों को “सरकारी अनुमति” के बिना कुछ भी छापने पर रोक।
  • न्यायपालिका पर दबाव – सुप्रीम कोर्ट तक को सीमित कर दिया गया।
  • कलाकारों और बुद्धिजीवियों को दबाने की कोशिश

यानी यह दौर सिर्फ राजनीतिक दमन का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने का उदाहरण बन गया।

किशोर कुमार पर कांग्रेस का हमला

अब आते हैं सबसे चर्चित घटना पर – किशोर कुमार (Kishore Kumar) केस
किशोर कुमार हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े पार्श्वगायक थे। उनकी आवाज़ 70 के दशक में हर दिल की धड़कन थी।

क्या हुआ?

  • 1975 में सूचना और प्रसारण मंत्री वी.सी. शुक्ला ने किशोर कुमार को बुलाया।
  • उनसे कहा गया – “कांग्रेस के प्रचार कार्यक्रमों में हिस्सा लो और इंदिरा गांधी के पक्ष में गाने गाओ।”
  • किशोर कुमार ने मना कर दिया। उनका कहना था कि कला को राजनीति से मजबूरी में नहीं जोड़ा जा सकता।

इसके बाद कांग्रेस ने क्या किया?

  • किशोर कुमार के गाने सभी सरकारी रेडियो स्टेशनों (All India Radio, Vividh Bharti) पर बैन कर दिए गए
  • फिल्मों के गाने भी रोक दिए गए, ताकि जनता उनकी आवाज़ न सुन सके।
  • कांग्रेस समर्थित अखबारों ने उन्हें “देशविरोधी” करार देने की कोशिश की।

जनता और सिनेमा पर असर:

  • लोग गुस्से में थे, लेकिन आवाज़ दबा दी गई।
  • किशोर कुमार खुद बताते थे – “मुझे मजबूर किया गया कि मैं राजनीतिक प्रचार करूँ, लेकिन मैंने कला की आत्मा को नहीं बेचा।”
  • बाद में जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार आई, तब यह प्रतिबंध हटाया गया और किशोर कुमार की आवाज़ फिर से रेडियो पर गूँजने लगी।

📌 किशोर कुमार केस – आपातकाल में कांग्रेस का दमन

घटनाविवरणप्रभाव
कांग्रेस का दबावचुनावी प्रचार में गाने गाने को मजबूर करनाकलाकार की स्वतंत्रता पर हमला
किशोर कुमार का इनकारसाफ कहा “मैं राजनीति में ज़बरदस्ती शामिल नहीं होऊँगा”व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा
बैन लगाया गयाAIR और Vividh Bharti पर गाने बंदजनता कला से वंचित
असरकलाकारों में डर, लेकिन प्रतिरोध की चिंगारीआपातकाल की दमनकारी छवि उजागर

“कला की स्वतंत्रता को राजनीति का गुलाम बनाने की कोशिश लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला है।” – शाह आयोग रिपोर्ट (Emergency पर जाँच आयोग)

देव आनंद का प्रतिरोध (Dev Anand vs Congress)

हिंदी सिनेमा के चॉकलेटी हीरो देव आनंद सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, असल जिंदगी में भी आज़ादी के हिमायती थे।

घटना क्या थी?

  • इंदिरा गांधी सरकार ने 1975 में बॉलीवुड के बड़े सितारों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की।
  • कांग्रेस चाहती थी कि ये फिल्मी सितारे आपातकाल को “देशहित का कदम” बताकर जनता को भ्रमित करें।
  • देव आनंद ने साफ़ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा – “मैं राजनीति का प्रचारक नहीं हूँ, मैं एक कलाकार हूँ।”

इसके बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया

  • उनकी कई फिल्मों पर अप्रत्यक्ष सेंसरशिप लागू की गई।
  • देव आनंद ने खुलकर बयान दिया कि वे “कांग्रेस पार्टी से नफ़रत करते हैं” और भविष्य में कभी भी उनके लिए प्रचार नहीं करेंगे।
  • उन्होंने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा भी की (हालांकि वह ज्यादा सफल नहीं रही)।

असर

देव आनंद का यह कदम उस दौर में बेहद साहसिक था, क्योंकि कलाकारों को डर था कि अगर सरकार के खिलाफ़ गए तो उनका करियर खत्म हो सकता है। लेकिन देव आनंद ने कहा –

“सच्चा कलाकार वही है जो अन्याय और दमन के खिलाफ़ खड़ा हो।”

मनोज कुमार और अदालत की लड़ाई

फिल्मों में देशभक्ति की छवि रखने वाले अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार भी आपातकाल के शिकार बने।

किस्सा – फिल्म रोटी कपड़ा और मकान

  • इस फिल्म में एक गाना था:
    “जिस गली में गरीबी बसती है, उस गली से अमीरी शर्माती है…”
  • कांग्रेस सरकार को यह गाना “सिस्टम की आलोचना” लगा।
  • सरकार ने इस गाने पर सवाल उठाए और फिल्म को रोकने की कोशिश की।

मनोज कुमार का प्रतिरोध

  • उन्होंने कहा – “मैंने सच्चाई दिखाई है, अगर यह सरकार को चुभ रही है तो इसका मतलब है कि हालात वाकई बुरे हैं।”
  • मामला अदालत तक पहुँचा।
  • अंत में अदालत ने फिल्म को रिलीज़ करने की अनुमति दी।

प्रभाव

  • यह केस दर्शाता है कि आपातकाल में सिनेमा की आज़ादी भी खतरे में थी।
  • सरकार किसी भी डायलॉग, गाने या दृश्य को देशविरोधी करार देकर रोक सकती थी।
  • लेकिन मनोज कुमार ने पीछे हटने से इनकार किया।

📌 देव आनंद बनाम मनोज कुमार केस

कलाकारकांग्रेस से टकरावनतीजा
देव आनंदप्रचार में हिस्सा लेने से इनकार, कांग्रेस से दूरीफिल्मों पर सेंसर, राजनीतिक बहिष्कार, पर जनता का समर्थन
मनोज कुमाररोटी कपड़ा और मकान के गाने पर रोक की कोशिशअदालत में जीत, फिल्म रिलीज़ हुई, सरकार की नाकाम सेंसरशिप

🎭 किशोर कुमार vs देव आनंद vs मनोज कुमार

पहलूकिशोर कुमारदेव आनंदमनोज कुमार
दमन का तरीकारेडियो/फिल्मी गानों पर बैनफिल्मों पर सेंसर और राजनीतिक बहिष्कारगानों और डायलॉग पर रोक की कोशिश
प्रतिरोधप्रचार में गाने से इनकारकांग्रेस से नफ़रत का ऐलानअदालत में लड़ाई
असरकलाकारों में भय और गुस्साजनता का सम्मान बढ़ाआज़ादी की मिसाल बनी

साउथ भारत में लोकतंत्र का दमन – स्नेहलता रेड्डी, करुणानिधि और वरवर राव केस

आपातकाल का असर सिर्फ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं था। साउथ इंडिया (South India) के कलाकारों, बुद्धिजीवियों और नेताओं को भी कांग्रेस सरकार ने बुरी तरह निशाना बनाया।

🎭 स्नेहलता रेड्डी (Snehalata Reddy Case)

स्नेहलता रेड्डी कर्नाटक की प्रसिद्ध रंगकर्मी (Theatre Artist) और सामाजिक कार्यकर्ता थीं।

क्या हुआ?

  • आपातकाल में उन्हें “सरकार विरोधी गतिविधियों” का आरोप लगाकर मीसा (MISA – Maintenance of Internal Security Act) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
  • उन्हें महीनों तक जेल में रखा गया।
  • जेल में उन्हें गंभीर अस्थमा और स्वास्थ्य समस्याएँ थीं, लेकिन इलाज से वंचित रखा गया।

नतीजा

  • जेल में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और 1977 में उनकी मृत्यु हो गई।
  • उनकी मौत आपातकाल की सबसे दर्दनाक कहानियों में गिनी जाती है।

“कलाकार को कैद करना, कला की आत्मा को कैद करने जैसा है।” – एक साथी रंगकर्मी का बयान

🏛️ करुणानिधि और DMK की बर्खास्तगी

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि (M. Karunanidhi) आपातकाल के सबसे बड़े राजनीतिक शिकार बने।

घटनाक्रम

  • करुणानिधि और उनकी पार्टी DMK (Dravida Munnetra Kazhagam) इंदिरा गांधी की नीतियों का खुलकर विरोध कर रहे थे।
  • 1976 में इंदिरा गांधी ने करुणानिधि की सरकार बर्खास्त कर दी।
  • DMK नेताओं को जेल में डाल दिया गया।

नतीजा

  • कांग्रेस ने तमिलनाडु की जनता की चुनी हुई सरकार गिरा दी, सिर्फ इसलिए कि वह विरोध कर रही थी।
  • इससे पूरे साउथ में कांग्रेस विरोधी लहर फैल गई।
  • बाद में यही लहर DMK और AIADMK की राजनीति को मजबूत करने का कारण बनी।

✍️ वरवर राव और बुद्धिजीवियों पर दमन

वरवर राव (Varavara Rao) तेलुगु साहित्यकार और कवि थे, जो सरकार की नीतियों के खिलाफ लिखते थे।

कांग्रेस का कदम

  • आपातकाल के दौरान वरवर राव और उनके जैसे कई कवियों-लेखकों को “देशद्रोही” कहकर जेल में डाला गया।
  • उनकी कविताएँ और लेख प्रतिबंधित कर दिए गए।

असर

  • बुद्धिजीवियों में गुस्सा और आक्रोश फैला।
  • कई लेखकों ने इमरजेंसी को “भारत का काला अध्याय” बताया।

📌 साउथ इंडिया में कांग्रेस का दमन

व्यक्तित्वपेशाकांग्रेस की कार्रवाईनतीजा
स्नेहलता रेड्डीरंगकर्मीMISA के तहत जेल, इलाज से वंचितजेल में मौत
एम. करुणानिधिमुख्यमंत्री (DMK)सरकार बर्खास्त, नेताओं की गिरफ्तारीतमिलनाडु में कांग्रेस विरोध बढ़ा
वरवर रावकवि, लेखकलेखों पर प्रतिबंध, जेलसाहित्य जगत में प्रतिरोध

“जब सरकार कवि की आवाज़ से डरने लगे, तो समझ लीजिए कि लोकतंत्र खत्म हो चुका है।” – वरवर राव

📰 आपातकाल में कांग्रेस ने कैसे लोकतंत्र का गला घोंटा

आपातकाल (Emergency) का सबसे काला पहलू यह था कि कांग्रेस ने न सिर्फ कलाकारों और बुद्धिजीवियों को दबाया, बल्कि प्रेस (Press), न्यायपालिका (Judiciary) और विपक्षी नेताओं को भी कुचल दिया।

📰 प्रेस सेंसरशिप (Press Censorship)

क्या हुआ?

  • 26 जून 1975 की रात को दिल्ली के इंडियन एक्सप्रेस और स्टेट्समैन जैसे अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई।
  • सरकार ने आदेश दिया कि बिना सेंसर की अनुमति के कोई खबर छप नहीं सकती।
  • कार्टूनिस्ट अब्दुल्ला (Abu Abraham) के कई कार्टून बैन कर दिए गए।
  • मशहूर पत्रकार कुलदीप नैयर को जेल में डाल दिया गया।

असर

  • अखबारों में सिर्फ “सरकारी विज्ञापन” और “इंदिरा गांधी की उपलब्धियाँ” छपती थीं।
  • प्रेस की आज़ादी पूरी तरह खत्म हो गई।

“प्रेस को घुटनों के बल बैठा दिया गया था।” – कुलदीप नैयर

🚔 विपक्षी नेताओं पर अत्याचार

गिरफ्तारियाँ

  • जयप्रकाश नारायण (JP Movement) – आंदोलन के नेता को जेल में डाला गया।
  • अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, चंद्रशेखर – सभी को गिरफ्तार कर दिया गया।
  • देशभर में लगभग 1 लाख से अधिक राजनीतिक कैद हुए।

अत्याचार

  • नेताओं को महीनों तक बिना मुकदमे के जेल में रखा गया।
  • कई पर थर्ड डिग्री टॉर्चर और मानसिक दबाव डाला गया।

⚖️ न्यायपालिका पर हमला

  • सुप्रीम कोर्ट ने जून 1975 में इंदिरा गांधी की चुनावी जीत को अवैध (Invalid) करार दिया था।
  • इसके तुरंत बाद इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू कर दिया।
  • न्यायपालिका को दबाने के लिए “Committed Judiciary” का नारा दिया गया।
  • जजों पर दबाव डाला गया कि वे सरकार के फैसलों को चुनौती न दें।

📊 लोकतंत्र की संस्थाओं पर हमला

संस्थाकांग्रेस का कदमनतीजा
प्रेससेंसरशिप, बिजली कटौती, पत्रकारों की गिरफ्तारीप्रेस की स्वतंत्रता खत्म
विपक्षबड़े नेताओं की गिरफ्तारी, 1 लाख से ज्यादा कैदराजनीतिक विरोध कुचल दिया गया
न्यायपालिकासुप्रीम कोर्ट पर दबाव, जजों की आज़ादी छीननान्यायपालिका की साख गिरी

❌ लोकतंत्र का दम घुटना

इमरजेंसी में:

  • जनता बोल नहीं सकती थी।
  • मीडिया लिख नहीं सकता था।
  • नेता विरोध नहीं कर सकते थे।
  • अदालतें न्याय नहीं कर सकती थीं।

यानी लोकतंत्र नाम की कोई चीज़ नहीं बची थी।

“आपातकाल भारत के लोकतंत्र की आत्मा पर सबसे बड़ा हमला था।” – रामचंद्र गुहा (इतिहासकार)

कांग्रेस और लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय

आपातकाल (Emergency) और कांग्रेस द्वारा कलाकारों, पत्रकारों, लेखकों और विपक्षी नेताओं पर किया गया दमन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे शर्मनाक अध्याय माना जाता है।

  • किशोर कुमार जैसे गायक को गाने से बैन किया गया।
  • स्नेहलता रेड्डी जैसी रंगकर्मी जेल में इलाज के बिना मर गईं।
  • करुणानिधि की सरकार बर्खास्त कर दी गई।
  • वरवर राव जैसे कवि को जेल में डाल दिया गया।
  • प्रेस की आज़ादी छीन ली गई।
  • विपक्षी नेताओं को कैद कर दिया गया।
  • न्यायपालिका पर दबाव डाला गया।

👉 इन सभी घटनाओं ने साफ कर दिया कि कांग्रेस ने उस दौर में लोकतंत्र (Democracy) को बुरी तरह कुचला।

❓ FAQ

1. आपातकाल कब लगाया गया था?

आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लगा रहा।

2. आपातकाल क्यों लगाया गया?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी की चुनावी जीत को अवैध घोषित कर दिया था। सत्ता बचाने के लिए इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया।

3. क्या सच में किशोर कुमार ने कांग्रेस का प्रचार करने से मना कर दिया था?

हाँ, उन्होंने सरकारी प्रचार कार्यक्रम में गाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद रेडियो और टीवी पर उनके गाने बैन कर दिए गए।

4. साउथ इंडिया में किसको सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?

  • स्नेहलता रेड्डी (जेल में मृत्यु)
  • करुणानिधि (सरकार बर्खास्त)
  • वरवर राव (जेल और प्रतिबंध)

5. प्रेस की आज़ादी कैसे छीनी गई?

सरकार ने आदेश दिया कि बिना सेंसरशिप अनुमति कोई खबर छप नहीं सकती। कई पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया।

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