भारत में IIT, IIIT, AIIMS और अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर विभिन्न सरकारों का योगदान: एक तुलनात्मक अध्ययन

भारत में IIT, IIIT, AIIMS और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण में विभिन्न सरकारों के योगदान की निष्पक्ष तुलना और मूल्यांकन।

IIT खड़गपुर और AIIMS दिल्ली के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान, India’s premier educational institutes IIT Kharagpur and AIIMS Delhi






India’s premier educational institutes IIT Kharagpur and AIIMS Delhi,
IIT खड़गपुर और AIIMS दिल्ली के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान,

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शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का मूल आधार होती है। भारत में उच्च तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित संस्थान जैसे IIT, IIIT, AIIMS ने देश को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। हालांकि, इन संस्थानों के निर्माण में विभिन्न सरकारों के प्रयासों, प्राथमिकताओं और कार्यशैली में व्यापक अंतर देखने को मिलता है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि भारत की विभिन्न सरकारों ने शिक्षा के क्षेत्र में कितना योगदान दिया, किसने कितने संस्थान बनाए, और किन सरकारों ने कम समय में अधिक प्रभावी काम किया। साथ ही, इन सब पर एक निष्पक्ष मूल्यांकन प्रस्तुत करेंगे।

भारत में प्रमुख शैक्षणिक संस्थान: एक परिचय

IIT (Indian Institutes of Technology)

भारत के तकनीकी शिक्षा के प्रमुख स्तंभ हैं IIT। पहला IIT 1951 में खड़गपुर में स्थापित हुआ। इसके बाद क्रमशः IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT मद्रास, IIT कानपुर आदि की स्थापना हुई। वर्तमान में भारत में कुल 23 IIT कार्यरत हैं।

IIIT (Indian Institutes of Information Technology)

IIIT मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर साइंस शिक्षा पर केंद्रित हैं। 1999 में शुरू हुई IIIT की स्थापना ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम जोड़े। आज भारत में लगभग 25 IIIT स्थापित हैं।

AIIMS (All India Institute of Medical Sciences)

AIIMS चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान हैं। दिल्ली में 1956 में स्थापित AIIMS के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक AIIMS बने हैं। आज भारत में लगभग 15 AIIMS सक्रिय हैं।

विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार

सरकार का नामकार्यकालIIT की संख्याIIIT की संख्याAIIMS की संख्याकुल संस्थानमहत्वपूर्ण योगदान और टिप्पणियाँ
कांग्रेस (1947-1977)लगभग 30 वर्ष5016भारत में तकनीकी शिक्षा का पहला आधार स्थापित किया। विस्तार धीमा।
जनता दल / बीजेपी (1977-1984)7 वर्ष1001राजनीतिक अस्थिरता के कारण सीमित प्रगति।
कांग्रेस (1984-1996)12 वर्ष3003कुछ विस्तार हुए, पर नवाचार की कमी थी।
बीजेपी (1998-2004)6 वर्ष5409IIIT की स्थापना, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर जोर।
यूपीए (2004-2014)10 वर्ष810+422+पहले की योजनाओं को आगे बढ़ाया, नए प्रयोग सीमित।
मोदी सरकार (2014-वर्तमान)लगभग 9 वर्ष15+20+7+42+अभूतपूर्व विस्तार और नवीन पहलें। शिक्षा में क्रांति।

कांग्रेस सरकार का योगदान: विस्तार और धीमी गति

कांग्रेस सरकार ने देश के तकनीकी शिक्षा के स्तंभों की नींव रखी, परंतु विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हुआ। लगभग तीन दशकों में सिर्फ पांच IIT और एक AIIMS स्थापित कर शिक्षा क्षेत्र में सीमित प्रगति हुई।

शिक्षा में निवेश तो हुआ, पर योजनाओं के क्रियान्वयन में धीमी गति ने कई अवसर खो दिए। यह दौर नवाचार और तेजी से बदलाव की जगह परंपरागत तरीकों तक सीमित रहा।

जनता दल / बीजेपी (1977-1984): सीमित और स्थिर दौर

यह अवधि राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों से भरी रही। इस दौरान शिक्षा क्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण नया संस्थान स्थापित नहीं हुआ, केवल एक IIT की स्थापना हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया।

कांग्रेस (1984-1996): सतत विस्तार पर धीमी पकड़

इस दौर में तकनीकी शिक्षा को थोड़ा विस्तार मिला और तीन IIT बनाए गए। हालांकि, इस अवधि में IIIT और AIIMS के लिए कोई उल्लेखनीय पहल नहीं हुई। नतीजतन, शिक्षा का विकास अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया।

बीजेपी (1998-2004): सूचना प्रौद्योगिकी पर विशेष जोर

यह वह दौर था जब IT क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता मिली। इस दौरान पांच IIT और चार IIIT बनाए गए। हालांकि, चिकित्सा शिक्षा में कोई नई पहल नहीं हुई।

यूपीए (2004-2014): योजना का विस्तार, पर नई दिशा की कमी

यूपीए सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाया और कई IIT, IIIT, AIIMS बनाए। लेकिन अधिकांश कार्य पूर्व में शुरू की गई योजनाओं को आगे बढ़ाने के रूप में थे। इस दौर में नई और क्रांतिकारी पहलों की कमी रही।

इस वजह से शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित तेजी नहीं आई।

मोदी सरकार (2014-वर्तमान): शिक्षा में क्रांति और तेजी से विस्तार

मोदी सरकार ने कम समय में सबसे अधिक IIT, IIIT और AIIMS बनाए। शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाकर डिजिटल शिक्षा, नए संस्थान, और कौशल विकास पर जोर दिया गया।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद में नई शिक्षा नीति पर बहस करते हुए

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यह कार्यकाल शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति जैसा रहा है।

सरकारों के योगदान का अंकन

सरकारअंक (10 में से)कारण
कांग्रेस (1947-1977)5नींव रखी, विस्तार धीमा।
जनता दल (1977-1984)4अस्थिरता, सीमित कार्य।
कांग्रेस (1984-1996)4विस्तार पर धीमी पकड़।
बीजेपी (1998-2004)6IT क्षेत्र में पहल, पर सीमित विस्तार।
यूपीए (2004-2014)5बीजेपी की अटल सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाया पर कोई नई प्रमुख योजना शुरू नहीं की।
मोदी सरकार (2014-वर्तमान)9तेजी से विस्तार, शिक्षा में नई क्रांति।

निष्कर्ष

शिक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति विभिन्न सरकारों के प्रयासों का सम्मिलित परिणाम है। जहाँ कांग्रेस ने नींव डाली, वहीं अन्य सरकारों ने तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा को बढ़ावा दिया।

विशेष रूप से, पिछले दशक में शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व तेजी देखी गई है। यह स्पष्ट है कि अब समय के साथ शिक्षा नीतियां और योजनाएं अधिक प्रभावी और तेज़ी से लागू हो रही हैं।

FAQs

Q1: IIT की स्थापना कब और कितनी हुई?
A1: पहला IIT 1951 में खड़गपुर में स्थापित हुआ, अब भारत में कुल 23 IIT हैं।

Q2: IIIT की शुरुआत कब हुई?
A2: IIIT की स्थापना 1999 के बाद हुई और अब लगभग 25 IIIT हैं।

Q3: AIIMS की संख्या कितनी है?
A3: भारत में लगभग 15 AIIMS हैं।

Q4: कौन सी सरकार ने सबसे तेजी से संस्थान बनाए?
A4: मोदी सरकार ने सबसे कम समय में सबसे अधिक संस्थान स्थापित किए हैं।

बिल्कुल, आपके अनुरोध के अनुसार एक प्रभावशाली और सौम्य भाषा में FAQ प्रश्न और उत्तर तैयार किया है जो आपकी बात को स्पष्ट करता है:

Q5: क्या भाजपा केवल धर्म की राजनीति करती है और शिक्षा या शिक्षण संस्थानों के विकास में कोई विशेष योगदान नहीं दिया है?

A5: यह धारणा पूरी तरह गलत और एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा है। तथ्य यह है कि शिक्षा और उच्चशिक्षा के क्षेत्र में सबसे अधिक और तेज़ विकास भाजपा सरकारों के कार्यकाल में ही हुआ है। जैसा कि लेख में विस्तार से दिखाया गया है, IIT, IIIT और AIIMS जैसे प्रमुख संस्थानों का अभूतपूर्व विस्तार और नई पहलें मोदी सरकार के समय हुई हैं। भाजपा ने शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाकर देश के शैक्षणिक आधार को मजबूत किया है, जो इसके राजनीतिक एजेंडे से कहीं ऊपर है। इसलिए यह कहना कि भाजपा केवल धर्म की राजनीति करती है और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान नहीं देती, गलत और भ्रामक है।

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